Pariksha Pe Charcha: 'आगे क्या करना है' सवाल को एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल दें- PM मोदी

पीएम मोदी ने अभिभावकों, शिक्षकों से अपील की कि वो छात्रों पर परीक्षा का दबाव न बनाएं. उन्होंने 'परीक्षा पे चर्चा' के दौरान अभिभावकों की अतिव्यस्तता पर भी बात की. 

Pariksha Pe Charcha: 'आगे क्या करना है' सवाल को एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल दें- PM मोदी
तस्वीर:ट्विटर/NarendraModi

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ 'परीक्षा पे चर्चा' कर रहे हैं. उन्होंने सीबीएसई की परीक्षा में शामिल हो रहे छात्रों का खास तौर पर जिक्र किया.  पीएम मोदी ने कहा कि आप लोगों से न मिल पाने से बड़ा नुकसान हुआ है. 

10वीं-12वीं के बाद क्या? के सवाल पर पीएम मोदी ने दी ये प्रतिक्रिया

पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों को 10वीं-12वीं की परीक्षा के बाद आगे क्या करना है, जैसे सवालों के नीचे दबाना नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसे सवालों को बच्चों को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों को सेलिब्रिटी कल्चर के पीछे न ढकेला जाए. क्योंकि प्रचार माध्यमों में सिर्फ हजार - दो हजार लोग ही चकाचौंध भरी जिंदगी जीते दिखते हैं. ये असली दुनिया नहीं है. दुनिया में और भी ज्यादा अवसर हैं. जीवन की सच्चाई ये है कि जितने लोग हैं, उतनी विभिन्नताएं हैं. जितने लोग हैं, उतने अवसर भी हैं. ऐसे में हमें अपने भविष्य को विस्तार देने की आवश्यकता है. पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों को 10वीं-12वीं की परीक्षा के बाद अपने आसपास की चीजों पर ध्यान देना चाहिए. दूर की चीजों की चमक पर न जाएं. सपने पालना और देखना अच्छा लगता है. खोए खोए रहना अच्छी बात है. सपने देखना अच्छी बात है, लेकिन उसके लिए सोते रहना गलत है. पीएम मोदी ने कहा कि सपने देखते रहने से आगे बढ़कर अपने सपनों को पूरा करने का संकल्प बनाना चाहिए. जैसे ही आप ये संकल्प ले लेंगे कि उन्हें आगे क्या हासिल करना है, वैसे ही आगे का रास्ता सरल तरीके से दिखता जाएगा.

पीएम मोदी ने मेमोरी बढ़ाने को लेकर कही ये बात

पीएम मोदी ने एक बच्ची के सवाल पर चुटकी ली और कहा कि अब इन्हें मेमोरी बढ़ाने की भी जड़ीबूटी चाहिए. इसके बाद पीएम मोदी ने इस बारे में खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि लोग भूलते नहीं हैं. बहुत कुछ याद रहता है. बस, लोगों के तरीके अलग अलग होते हैं. उन्होंने कहा कि पसंद की चीजों को याद करने की कोशिश नहीं करनी पड़ती. जिन चीजों से आप जुड़ जाते हैं, वो चीजें आपका हिस्सा बन जाती हैं और आप उन्हें कभी नहीं भूल पाते. ऐसे ही पढ़ाई भी है. उन्होंने कहा कि ये मामला आंतरिक पसंद-नापंसद से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि आपको किसी चीज को याद करने की जगह आपको उसे जीने की कोशिश करनी चाहिए. क्योंकि टैलेंट सबके पास उतना ही होता है.

खाली समय को पीएम मोदी ने बताया खजाना

पीएम मोदी ने परीक्षा के दौरान 'खाली समय' को खजाना बताया. उन्होंने कहा कि खाली समय से ही तो जिंदगी का मतलब पता चलता है, वर्ना जिंदगी रोबोट जैसी हो जाती है. उन्होंने बताया कि खाली समय भी दो तरह के होते हैं. उन्होंने छुट्टियों, जिम्मेदारियों, लक्ष्यों का उदाहरण देकर समझाया. उन्होंने अचानक मिलने वाले समय के बारे में भी विस्तार से समझाया.

बच्चों पर न बनाएं ज्यादा दबाव

पीएम मोदी ने अभिभावकों, शिक्षकों से अपील की कि वो छात्रों पर परीक्षा का दबाव न बनाएं. उन्होंने 'परीक्षा पे चर्चा' के दौरान अभिभावकों की अतिव्यस्तता पर भी बात की. उन्होंने कहा कि बच्चों के माता-पिता के पास समय ही नहीं होता कि वो बच्चों के साथ बिता सकें. ऐसे में वो सिर्फ बच्चों के रिपोर्ट कार्ड तक ही सीमित रह जाते हैं और अपने ही बच्चे के बारे में नहीं जान पाते.

आखिरी मौका नहीं है परीक्षा

पीएम मोदी ने कहा कि परीक्षा को ही आखिरी मौका नहीं मानना चाहिए. इसे कभी जीवन मरण का प्रश्न नहीं बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि परीक्षा खुद के मूल्यांकन का मौका होता है, हम ताकि खुद को कसौती पर कस सकें. हमें इससे भागना नहीं चाहिए.

अरुणाचल की छात्रा ने पूछा-जो विषय पसंद नहीं, उसका क्या करें?

पीएम मोदी ने कहा कि ये सवाल अलग तरह का है. दरअसल, छात्रा ने पूछा था कि जिस विषय से उन्हें बिल्कुल भी लगाव नहीं है, आखिर उन्हें वो विषय जबरदस्ती क्यों पढ़ना पड़ता है. पीएम मोदी ने अपने जवाब में कहा कि आप अकेले ऐसे नहीं हैं, जिन्हें ये झेलना पड़ता है. उन्होंने कहा कि दुनिया में हर किसी के पास ऐसी परिस्थितियां होती हैं. उन्होंने शर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि आपके पास 5-6 शर्ट होते हैं, लेकिन उनमें से आप दो को ही बार-बार क्यों पहनते हैं. उन्हें इसे मनुष्य के पसंद-नापसंद और लगाव की बात से जोड़ा. उन्होंने कहा कि इसमें डर जैसी कोई बात नहीं. पीएम मोदी ने कहा कि जब कोई चीज आपको अच्छी लगने लगती है, तो आप उसके साथ सहज हो जाते हैं. लेकिन जो चीजें आपको अच्छी नहीं लगती, उसके तनाव में आप अपनी 80 फीसदी ऊर्जा लगा देते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि ऐसा करना गलत है. हमारे लिए सही ये है कि हम अपनी ऊर्जा बराबर खर्च करें और बराबर समय सभी विषयों को दें.

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सफल लोग हर विषय के नहीं होते ज्ञाता

जो लोग बहुत सफल हैं, वो हर विषय में पारंगत नहीं होते. लेकिन किसी एक विषय पर उनकी पकड़ जबरदस्त होती है. उन्होंने लता मंगेशकर का उदाहरण देते हुए कहा कि वो पूरी दुनिया में मशहूर हैं. लेकिन उनसे अगर भूगोल की कक्षा में पढ़ाने को कहे तो उन्हें कैसा लगेगा? लेकिन अगर उन्हें संगीत में कुछ करने को कहा जाए, तो वो पूरी दुनिया में सबसे बेहतरीन हैं. इसी तरह से अगर आपको कोई विषय कठिन लग रहा है, तो ये जीवन में सबसे बड़ी परेशानी नहीं है. आप उसमें भी समय दें. पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षकों को ऐसी सूरत में बच्चों पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना होगा. बच्चों को टोकने-रोकने की जगह उन्हें प्रोत्साहित करें. 

पीएम मोदी ने क्रिएटिविटी पर दिया जोर

पीएम मोदी ने 'जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि' लोकोक्ति के माध्यम से कहा कि बच्चों को, शिक्षकों को क्रिएटिव बनना होगा. उन्हें थोड़ा अलग हटकर सोचना होगा. ऐसे में किसी भी विषय का डर उनके मन से आसानी से निकल जाएगा.

धार्मिक होने के साथ सामाजिक सेवा भी जरूरी

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे जीवन में धार्मिक होने के साथ ही सामाजिक जीवन भी जरूरी है. आप को अपने समाज के लोगों की भी सुध लेनी चाहिए. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आप अगर अपने आस पास के लोगों से उनका हाल-चाल भी नहीं पूछते हैं, तो बच्चे को जीवन का एक अहम पाठ सिखाना भूल जाते हैं. उन्होंने कहा कि परिजनों को चाहिए कि वो खुशियों में सबको शामिल करें. अपने घर में काम करने वालों को भी. इस बच्चों को सामाजिक जीवन का भी महत्व पता चलता है. 

घर के वातावरण में न करें बेटे-बेटी में अंतर

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे घरों में बेटे-बेटियों में जाने-अनजाने अंतर किया जाता है. ऐसा नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आप घर में जो संस्कार देते हैं, वही बच्चे जीवन भर के लिए सीखते हैं.

पीएम मोदी ने बताया-किताब में जोड़ी गई हैं कई नई बातें

पीएम मोदी ने अपनी लिखी किताब 'एग्जाम वॉरियर' की भी बात की. उन्होंने कहा कि किताब में कई बातें जोड़ी गई हैं. इस बात परीक्षार्थियों के साथ ही उनके माता-पिता और शिक्षकों के लिए भी कई बातें जोड़ी गई हैं.

कोरोना ने बताया संयुक्त परिवार की असली ताकत

पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना काल में संयुक्त परिवार ने समाज को संभाले रखा. उन्होंने कहा कि कोरोना आने के बाद सोशल डिस्टेंसिंग भले ही बढ़ा, लेकिन परिवारों में नजदीकियां बढ़ी. पीएम मोदी ने कहा कि काढ़ा, साफ-सफाई भले ही कोरोना की वजह से फिर से लोगों की जिंदगियों में आया हो, लेकिन अगर ये सब कुछ पहले की तरह ही हमारे समाज का हिस्सा रहता, तो ज्यादा बेहतर रहता. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे समाज की सबसे बड़ी ताकत हमारे संयुक्त परिवार हैं.

पीएम मोदी का ट्वीट

पीएम मोदी ने ट्वीट करके 'परीक्षा पे चर्चा' की जानकारी दी थी. वो अहम मौकों पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से बात करते रहते हैं और अपना अनुभव भी शेयर करते हैं.

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